बच्चों की एकाग्रता और याददास्त कैसे बढाएं

पढ़ने वाले बच्चों की मानसिक दुर्बलता और मनोविकार कैसे मिटाये -

पढ़ाई के लिए एकाग्रता बहुत जरूरी है।
एकाग्रता यदि न हो, तो विद्यार्थी जीवन नरक
बन सकता है।

बच्चों की एकाग्रता और याददास्त कैसे बढाएं

जल्दी और असरदार रूप से एकाग्रता बढ़ाने के लिए आयुर्वेद में ब्रेन की अवयवों को ठीक करने वाली ऐसी जड़ीबूटियों ब्राह्मी, स्मृतिसागर रस आदि के योग हैं, जो आसान तरीके से आपकी एकाग्रता एवं याददास्त में वृद्धि कर अवसाद यानी डिप्रेशन को मिटा सकते हैं।
एकाग्रता और दिमाग को धारदार बनाने एवं मन को खुश रखने के लिए पोषण

तत्वों का सेवन करें -

हमारे द्वारा किये गए भोजन से ही तन और मन दोनों का पोषण होता है। पोषक तत्वों से रहित अन्नादि के कारण शरीर व मानसिक शक्तियों को जागृत करने या देखभाल करने में असहज हो जाता है अथवा तन-मन का पोषण करने में असमर्थ होता है।

पोषण की कमी से होने वाले 9 दुष्प्रभाव --

[1] छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आता है,
[2] नाराजगी, चिढ़-चिढ़ापन, क्रोध बना रहता है,
[3] समय पर नींद नहीं आती है,
[4] भय-भ्रम, चिन्ता और बैचेनी जैसे लक्षण
उत्पन्न हो सकते हैं।
[5] सारे प्रयासों, मेहनत एवं लगन के बाद भी
आशा के अनुरूप यश-कीर्ति, सफलता न मिलना,
[6] मनोनुकूल यानि मन के अनुसार कोई भी कार्य न होना,
[7] इच्छा शक्ति और आत्मविश्वास की कमी,
[8]  या फिर मनचाही वस्तु की प्राप्ति न मिल पाने के कारण मन खट्टा हो जाता है।
[9] हमेशा नकारात्मक विचारों का आना आदि  कारणों से उत्पन्न मानसिक दौर्बल्यता की वजह से बच्चों में धीमे-धीमे अवसाद यानी डिप्रेशन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

डिप्रेशन की वजह --

परीक्षा का समय है। इस दौरान बच्चों में भी यही अवस्था देखी जा सकती है। आजकल की भागदौड़ भारी जिंदगी में प्रतिस्पर्धा का दौर और पढ़ाई का बोझ बच्चों को डिप्रेशन में ल रहा है। कॉम्पटीशन के इस युग में बहुत से बच्चे मानसिक कमजोरी का शिकार हो रहे हैं। अपनी यह परेशानी वह माता-पिता को भी नहीं बताना चाहते। ऐसी अवस्था में अपने बच्चों के तन के साथ-साथ मन और ब्रेन का पोषण करने वाली 100 फीसदी आयुर्वेदिक उत्पाद बहुत लाभकारी सिद्ध होगा।
 
आयुर्वेद ग्रन्थ भेषजयरत्नावली एवं
दशानन रचित मंत्रमहोदधि के अनुसार
प्रकृति ने बहुमूल्य भंडार दिया है। एकाग्रता
बढ़ाने ओर दिमाग को तेज करने के लिए
इन्हीं ओषधियों से तैयार की गई
 
अमृतम की दो ओषधियाँ
 ब्राह्मी, जटामांसी, वच, मालकांगनी,
 स्मृतिसागर रस, त्रिलोक्य चिंतामणि रस,
 शंखपुष्पी और सोना-चांदी, आयरन, मूंगा
 अभरक इन द्रव्यों के भस्मों से  विलक्षण व

 गुणकारी दवाओं से निर्मित योग है।

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 【१】तन-मन की शक्ति तथा मानसिक बल बढ़ाता है।
 【२】बच्चों की स्मृति, मेधा, याददास्त, बुद्धि और
 【३】ब्रेन की कोशिकाओं को अपार शक्ति दायक है।
 【४】ब्रेन की गोल्ड में उपस्थित घटक-द्रव्य
 चिन्ता-शोक,दुःख-क्रोध से उत्पन्न मानसिक विकार तथा उदासी, डिप्रेशन दूर करने में असरदार साबित होता है।
【५】ब्रेन की गोल्ड में मिलाये गए द्रव्य ओज वर्द्धक भी हैं। दिमाग के शिथिल हो चुके तन्तुओं, नाडियों को रिचार्ज करने में प्रभावी हैं।
【६】ब्रेन की गोल्ड दिमाग का कायाकल्प कर अनेक प्रकार के मनोविकार मिटाता है।
 
 
 ब्रेन की गोल्ड को एक माह तक सेवन करने से
 तन-मन में स्फूर्ति, उत्साह का संचार होने लगता है, जिससे मनो दौर्बल्य का सर्वनाश हो जाता है।
 सम्पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए
 साथ में 1 टेबलेट ब्रेन की गोल्ड दूध के साथ बिना भूले एक महीने तक लगातार जरूर लें और तन मन को स्वस्थ्य-तन्दरुस्त बनाएं रखें।
 यह पूर्णतः आयुर्वेदिक ओषधि है। इसका कोई साइड इफ़ेक्ट यानि हानिकारक दुष्प्रभाव नहीं है। ब्रेन की गोल्ड को जीवन भर बेहिचक ले सकते हैं।
■ यह आत्मविश्वास से लबालब कर देता है। ■ डिप्रेशन को जड़ से मिटाता है।
■ याददास्त तेज करता है।
■ क्रोध व गुस्से को शांत करता है।
■ पोजीटिव सोच बनाता है।
■ नींद अच्छी लाता है।
■ डर, भय-भ्रम, चिन्ता दूर करता है।
■ मन व तन को बलशाली बनाता है।
■ पढ़ने और काम करने की ऊर्जा देता है।
 इसे सभी उम्र के, सभी वर्ग के स्त्री-पुरुष एवं बच्चों को नियमित सभी मौसम में दिया जा सकता है।
 
 डिप्रेशन, माइग्रेन, मनोविकार और मानसिक अशान्ति से बचाएंगे ये 25 उपाय
 
दुनिया में 90 करोड़ और भारत में 15 करोड़ से भी ज्यादा लोग माइग्रेन और डिप्रेशन
जैसे मानसिक रोगों के शिकार हैं।
क्या है माइग्रेन -
 
◆ क्या भुलक्कड़ पन के शिकार है?
◆ क्या आपकी याददास्त कमजोर हो चुकी है?
◆ क्या आपको कुछ भी याद नहीं रहता?
◆ क्या मेमोरी लॉस हो चुकी है?
इन सब मानसिक विकारों की अदभुत ओषधि है ब्राह्मी
ब्राह्मी बूटी
ब्रह्मण: इयं ब्राह्मी।
अर्थात-यह ब्रह्म या बुद्धि से संबंधित है यानी बुद्धिवर्धक है।
आयुर्वेद के अनुसार ब्राह्मी बाबू जमीन के अंदर या नीचे उत्पन्न होती हैं। जिन ओषधियों की जड़ उपयोग में विशेष लाभकारी होती हैं उन्हें जड़ी कहा गया है। जैसे -
सौंठ,अदरक,भूमि आँवला,हल्दी।
जड़ी और बूटी’ दोनों अलग-अलग शब्द हैं

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