योग आयुर्वेद और भगवान शिव

Read time : min

भारतीय संस्कृति में ईश्वर को मूलतः मानवीय क्षमताओं और आदर्शों की सर्वोत्तम अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाता है। इसका अर्थ है कि जो कुछ मानवीय है वही ईश्वरीय भी है, हमारे भगवान भी उन सब समस्याओं से जूझते हैं जिनसे एक आम इंसान जूझता है। सर्दियाँ आने पर मन्दिरों में भगवान को गर्म कपडे पहनाये जाते हैं, हमारे भगवान् बीमार भी होते हैं जगन्नाथ पुरी मंदिर में ऐसी परम्परा है कि भगवान जगन्नाथ को बुखार आता है और वे इस कारण कुछ दिनों तक आराम करते हैं, इस दौरान मंदिर के पट बंद रहते हैं। ऐसे अनेक उदहारण हमारे धर्मग्रंथों और लोक साहित्य में उपलब्ध हैं जिसमे इश्वर को मानवीय रूप में दिखाया गया है।

त्रिदेव कौन हैं?

त्रिदेव का सिद्धांत हमारे धर्म के मूल सिद्धांतों में से एक है त्रिदेव तीन देवताओं को माना गया है। ब्रह्मा जो सृष्टि की रचना करते हैं, विष्णु जो इसका पालन पोषण करते हैं, और शिव जो इसका संहार कर पुनः सृष्टि की रचना का चक्र शुरू करते हैं। साधारणतः शिव को संहारक या विनाशक के रूप में दिखाया जाता है, लेकिन सिर्फ संहार करना ही शिव का एकमात्र कार्य नहीं है।

शिव और आयुर्वेद में संबंध

आयुर्वेद के अनुसार शरीर तीन जैवीय उर्जाओं या त्रिदोष से बना है, जो वात, पित्त और कफ हैं। भगवान ब्रह्मा के साथ वात की समानता है क्योंकि उनके पास कोई आकार या रूप नहीं है, लेकिन सभी रोगों की उत्पत्ति या सृजन के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है। पित्त एक उग्र तत्व है जिसकी तुलना भगवान शिव से की जाती है, जो पाचन, शीर की ऊष्मा को बनाये रखना और दृष्टि आदि जैसे कार्यों के लिए जिम्मेदार है,  वहीं  कफ को भगवान विष्णु से जोड़कर देखा जाता है, जो पोषण और शक्ति प्रदान करते हैं।  एक बहुत ही प्रसिद्ध पौराणिक कथा है, जिसमे बताया गया है कि जब देवता और असुर मिलकर अमृत के लिए समुद्र मंथन कर रहे थे तब इस मंथन से हलाहल नाम का विष निकला,जिसकी वजह से पूरी सृष्टि में तबाही मचने लगी। इस तबाही को रोकने के लिए शिव ने वह विष स्वयं अपने गले में धारण किया और पूरी सृष्टि की रक्षा की इसी वजह से शिव का एक नाम नीलकंठ भी है। इसी मंथन से अमृत का घट लिए आयुर्वेद के प्रवर्तक देवता धन्वन्तरी की भी उत्पत्ति मानी गई है। इससे स्पष्ट है कि शिव और आयुर्वेद के बीच एक सीधा संबंध शुरू से ही रहा है।

आदि योगी शिव

योग के बिना आयुर्वेद की कल्पना भी नहीं की जा सकती, और धर्म ग्रंथों में शिव को ही “आदियोगी” यानि सबसे पहला योगी बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि सबसे पहले शिव ने अपनी पत्नी देवी पार्वती को योग की शिक्षा दी थी। इसके बाद भगवान शिव योग के आदि गुरु बन गए। उन्होंने पार्वती को योग के 84 आसन सिखाए जो वैदिक परम्परा से संबंधित हैं, ये 84 आसन व्यक्ति को सर्वश्रेष्ठ परिणाम देने की शक्ति रखते हैं, योग आसन  व्यक्ति के जीवन में दोषों को मिटाते हैं और शुभ परिणामों को प्रदान करते हैं। यह व्यक्ति को स्वस्थ, धनी, खुश और सफल रहने में सक्षम बनाते है। जिस रात शिव ने योग का यह ज्ञान पार्वती को दिया उसे महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। इस रात को उत्तरी गोलार्ध में ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है कि ऊर्जाओं का एक प्राकृतिक प्रवाह होता है। पार्वती के लिए शिव का प्रेम इतना दृढ़ था कि वह कभी भी इन योग के इन रहस्यों को उनके अलावा किसी और के साथ साझा नहीं करना चाहते थे। हालांकि, देवी पार्वती लोगों को पीड़ित नहीं देख सकती थीं और इस चमत्कारिक रहस्य को उनके साथ साझा करना चाहती थीं। उनका मानना ​​था कि वैदिक योग की सही तरीके से शुरुआत करने से दुनिया के कई दुखों को दूर किया जा सकता है।

कथाओं के अनुसार भगवान शिव इस ज्ञान को फ़ैलाने को लेकर काफी अनिच्छुक थे। उसने सोचा कि मानव जाति के पास इन ब्रह्मांडीय शक्तियों का सम्मान करने के लिए समझ नहीं है। लेकिन, अपने प्रेमपूर्ण दृष्टिकोण के साथ, पार्वती ने भगवान को उसी के लिए राजी कर लिया।

भगवान् शिव ने ये ज्ञान सप्त ऋषियों के साथ साझा किया और ऋषियों ने 18 सिद्धों को यह ज्ञान दिया। इन 18 सिद्धों ने हमें पृथ्वी पर दिव्य ज्ञान प्रदान किया। ऐसा माना जाता है कि 7 ऋषियों का यह उपदेश केदारनाथ के पास कांति सरोवर के तट पर हुआ था।

वेदों के संदर्भ

शिव ध्यान और मन के देवता भी माने जाते हैं, उन्हें कामदेव को भस्म करने वाला कहा गया है, यहाँ कामदेव का अर्थ उन चीजों या बुराइयों से है जिसके कारण हमारे मस्तिष्क की एकाग्रता भंग होती है। अधिकांश लोग भगवान विष्णु के अवतार धन्वन्तरी को आयुर्वेद के देवता के रूप में देखते हैं, लेकिन, सबसे पुराने वेद “ऋग्वेद” में यह रूद्र या सोम हैं जो कि स्वयं भगवान शिव हैं। ऋग्वेद में इस संदर्भ में श्लोक है-

(मंडल 2 सूक्त 33)

मा त्वा रुद्र चुक्रुधामा नमोभिर्मा दुःष्टुती वृषभ मा सहूती ।

उन्नो वीराँ अर्पय भेषजेभिर्भिषक्तमं त्वा भिषजां शृणोमि ॥

जिसमे रूद्र अर्थात शिव से आरोग्य और शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की गई है। वहीँ यजुर्वेद में,  रुद्र यज्ञ का बहुत ही महत्व है जो दीर्घायु प्रदान करता है। सभी उपचार प्रण और उपचार मंत्र उनकी योग शक्ति के माध्यम से उत्पन्न होते हैं। शिव को मृत्युंजय अर्थात मृत्यु को जीतने वाला भी माना गया है इस रूप में शिव हमें मृत्यु के पार ले जाते हैं, हमें बीमारी और दुःख भी दूर करते है।

शिव का प्रतीकशास्त्र

शिव तीन आँखों या त्र्यंबकम के रूप में सबसे प्रसिद्ध हैं। शिव की तीसरी आंख एकात्मक जागरूकता और सभी द्वंद्वों से परे है, पर्वत के स्वामी के रूप में शिव, हिमालय के कैलाश पर्वत में वास करते हैं जिसे पौराणिक ग्रंथों में सृष्टि का केंद्र माना गया है।

शिव के मस्तक पर बहने वाली गंगा नदी इस भौतिक दुनिया से परे योग और प्राकृतिक उर्जा का प्रतिनिधित्व करती है, शिव लिंग को एक उर्जा या ज्योति के स्तम्भ के रूप में वर्णित किया जाता है।

शिव कभी भी अकेले नहीं पूजे जाते उनके साथ आदि शक्ति, अर्थात शक्ति के नारी स्वरुप की भी पूजा की जाती है जिसे पौराणिक ग्रन्थ देवी पर्वती के रूप में वर्णित करते हैं।

शिव आयुर्वेद और योग के प्रवर्तक हैं वे प्रकृति और पुरुष (मानव) के बीच संतुलन का प्रतिनिधित्व करते हैं, आयुर्वेद भी मूलतः इसी संतुलन की बात करता है। शिव प्रकृति के जरिये ही मानव की सभी समस्याओं का हल करते हैं और आयुर्वेद भी प्राकृतिक साधनों के माध्यम से ही रोगों का उपचार करता है। शायद इसलिए वैदिक सभ्यता और उससे पहले हड़प्पा कालीन सभ्यताओं में भी प्रकृति की पूजा का वर्णन हमें मिलता है। शिव और आयुर्वेद दोनों ही हमें प्रकृति से प्रेम करना सिखाते हैं, और हमें प्रकृति के संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं। तो आइये इस शिवरात्रि हम प्रण लें कि हम आयुर्वेद में बताई गई प्राकृतिक और सात्विक जीवन शैली को अपनाएंगे और भगवान शिव द्वारा स्थापित आदर्शों का पालन करेंगे।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YOUR NEXT READ

Can You Use Ubtan on Sensitive Skin?

Ubtan for sensitive skin calls for fine powders, short contact time, and no scrubbing. Patch-test first to gently reduce redness and irritation.

Can You Use Aloe Vera Gel as a Makeup Primer?

Aloe vera gel as a makeup primer offers lightweight hydration. See how to layer it, prevent pilling, and pair it with the right foundation for your skin.

When Should You Use Ubtan Before Makeup?

Ubtan before makeup works best 2-3 hours ahead for most skin types; get skin-specific timing and prep tips for a smooth foundation base without irritation.

Should You Wash Your Hair Before a Festival?

Know when to wash hair before a festival: timing for oily, dry, and curly hair, plus prep for braids, blowouts, and heat styling for polished festive styling.

Can You Use Ubtan With Active Ingredients?

Use ubtan with active ingredients more carefully: space retinol, acids, and vitamin C apart, watch for irritation, and protect your skin barrier each day.

Talk to an Ayurvedic Expert!

Imbalances are unique to each person and require customised treatment plans to curb the issue from the root cause fully. Book your consultation - download our app now!

Learn all about Ayurvedic Lifestyle