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अर्थात-
ज्वरः शरीर को जर्जर कर देता है ।
।।अमृतम।।
सभी तरह के ज्वरः, मलेरिया, वायरस में बहुत ही उपयोगी है । अमृतम आयुर्वेद के प्रमुख ग्रंथ भैषज्य रत्नावली, आयुर्वेद निघण्टु में आठ प्रकार के ज्वर बताये गए हैं-
?वात ज्वर
?पित्त ज्वरः
?कफ ज्वर
?वातपित्त ज्वरः
?पित्तकफ़ ज्वरः
?वातकफ ज्वरः
?सन्निपात ज्वर
?आगन्तुक ज्वरः
इसके अतिरिक्त कच्चे ज्वरः में अज्ञानतावश चिकित्सा न करने या गलत दवाओं अथवा
अंग्रेजी मेडिसिन से ज्वरः बिगड़ जाए उसे विषम ज्वर कहते हैं । ये सात प्रकार के होते हैं ।
?रसगत ज्वरः
?रक्तगत ज्वरः
?मांसगत ज्वरः
?मेदगत ज्वरः
?अस्थिगत ज्वरः
?मज्जागत ज्वरः
?शुक्रगत ज्वरः
इन सब असाध्य ज्वर की चिकित्सा केवल आयुर्वेद में ही है । ज्वरः को जड़ से दूर करने हेतु फ्लूकी माल्ट अत्यंत सहायक है ।
शरीर में दोषों के कुपित होने से मनुष्य ताप सामान्य से अधिक हो जाता है, प्यास,दाह, तृष्णा,तन्द्रा,व्याकुलता के लक्षण प्रकट होते हैं,तो उसे ज्वर कहते हैं ।
ज्वर प्रत्येक प्राणी को होता है । पर केवल मनुष्य ही उसे सहन कर पाता है । शेष प्राणी अक्सर प्राण त्याग देते हैं । ज्वर को अनेक रोगों का जनक माना गया है ।
ज्वर तन को जर्जर कर देता है ।
आयुर्वेद की असरकारी जड़ी-बूटियों, प्राकृतिक हर्बल ओषधियों तथा 5 प्रकार के पित्त,ज्वरः नाशक मुरब्बो, से निर्मित फ्लूकी माल्ट आयुर्वेदिक ग्रंथ वर्णित सभी ज्वर (बुखार) विषम ज्वर (मलेरिया) चिकिनगुनिया,डेंगू फीवर, स्वाइन फ्लू, आदि के कारण हाथ-पैर,सिरदर्द एवं टूटन में भी उपयोगी है ।
फ्लूकी माल्ट आयुर्वेद की ऐसी ओषधि है जिसके नियमित सेवन से कोई भी ज्वर पनप नहीं पाता ।
फ्लूकी माल्ट में डाला गया
# चिरायता,
# सुदर्शन काढ़ा,
# नीम,
# कुटकी,
# नागरमोथा,
# करंज,
# गिलोय,
# तुलसी,
# सनाय,
# अतीस,
# पित्तपापड़ा,
# पटोलपत्र,
# त्रिफला,
# सौंठ, पिप्पली,
# पीपरामूल इला,
आदि के मिश्रण से निर्मित किया है ।
2 या 3 चम्मच सुबह खाली पेट, दिन में खाने के पहले रात में भोजन से पहले गुनगुने दूध से लेवें ।
सूर्यास्त के पश्चात दही,सलाद, जूस,फल,एवं गरिष्ठ व ठंडी वस्तुओं का सेवन न करे ।
फ़्लूकी माल्ट को 3 माह तक लगातार लेने से तन के सभी विकार,वायरस,बुख़ार,मलेरिया के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं । शरीर का तापमान हमेशा सामान्य रहता है ।
?शरीर में थकान,
?आलस्य,
?चिड़चिड़ापन,
?क्रोध,
?अनिंद्रा
की शिकायत नहीं रहती ।
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