जीवन का आधार
अर्थात
स्वास्थ्य ही सुन्दरता है।
सुन्दरता के लिए आदिकाल से अनेकों प्रकार के सौन्दर्य प्रसाधन के प्रयोग किये जा रहे हैं,
लेकिन क्या आप जानते है?
हजारों वर्षों से इसके लिए प्राकृतिक वस्तुओं,
दुनिया ने खुद को खूबसरत बनाने की चाह ने
प्राकृतिक संसाधनों से निर्मित
ये सब सुन्दरता बढ़ाने के प्राचीन साधन हैं।
सुन्दर, युवा, जवान और आकर्षक बने रहने के लिए
रानी-महारानियों ने सबसे पहले उबटन, "फेस क्लीनर तथा "
फेस क्लीनअप" की खोज की थी। आज भी चेहरे पर निखार व आकर्षण के लिए
आधुनिक ओर खानदानी महिलाओं की खासियत यह है कि वे
उन्हें न्यूनतम एवं घरेलू मेकअप और आयुर्वेदिक
"फेस क्लीनअप" ज्यादा पसन्द होता है।
इसी वजह से वह
अधिक उम्र में भी खूबसूरत और
जवान लगती हैं। घरेलू उबटन या आयुर्वेदिक "
फेस क्लीनअप" के उपयोग से उनमें कुछ
विशेष आकर्षण होता है।
समझदारी जरूरी है-
क्षतिग्रस्त त्वचा/डेमेज स्किन की मरम्मत करके
■ बादाम,
■■■ जैतून
■■■■ केशर,कुम-कुमादि ऑयल आदि विलक्षण ओषधियों को मिलाकर आयुर्वेद की प्राचीन परम्परा के मुताबिक पूरे विधि-विधान से तैयार किया है।
"एलोवेरा" इसे आयुर्वेद में घृतकुमारी भी कहते हैं, यह सर्वश्रेष्ठ
त्वचा निखार हर्बल ओषधि है
"शहद" एक त्वचा को मुलायम बनाकर चेहरे को निखारने वाली अदभुत ओषधि है।
प्राचीनकाल से मधु को
चेहरे की गन्दगी दूर करने के लिए लेप के रुप में उपयोग किया जा रहा है।
चेहरे को सुन्दर बनाता है।
टर्मरिक यानि हल्दी की कई खूबियां हैं।
रोमछिद्रों की गन्दगी बाहर निकाल कर कील-मुँहासे मिटाने में बेहद कारगर है। त्वचा को ठंडक देती है।
भरपूर होने से मरी हुई त्वचा जीवित होती है।
त्वचा का शुन्यपन कम होता है।
केशर- त्वचा को निखारने और
रंग साफ करने में यह बेजोड़ है। चेहरे के सभी दाग-धब्बे,
आंखों के नीचे का कालापन, तब्बे के निशान, डार्क सर्किल,
त्वचारोग नाशक बहुमूल्य ओषधि है।
जो क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की स्थाई मरम्मत कर अपनी त्वचा को दें - एक नया लुक, विशेष आकर्षण,खूबसूरती और आयाम,आराम,एहसास,
बादाम मिंगी, एलोवेरा, हल्दी, चिरौंजी, केशर, कूम-कुमादि तेल, संतरे व नीबू के छिलके, हनी, (शहद) और जैतून तेल कुम-कुमादि नेचुरल हर्बल ओषधियों के मिश्रण से बनाया है।