स्वास्थ्य ही सुन्दरता है | Health is Beauty

जीवन का आधार

Health is Beauty

अर्थात

स्वास्थ्य ही सुन्दरता है।

प्राचीन काल के आयुर्वेदाचार्यों ने
स्वास्थ्य की सुन्दरता के लिए
भव्य-भाषा के भाव से भवपूरित
 
होकर,भावनात्मक विचारों से
भरकर लाखों-हजारों
आयुर्वेदिक भाष्यों,
उपनिषदों,

ग्रन्थ-शास्त्रों निघण्टु की रचना की।

 
अपनी कृतियों में कष्ट-क्लेश निवारण
हेतु अनेक रोग चिकित्सा का वर्णन किया।
अमृतम जीवन के उपाय लिखे।

अमृतम वचन-

अच्छे स्वास्थ्य
वाले के साथ,सदा
100 हाथ (साथी,मित्र,फ्रेंड)
होते हैं। आयुर्वेद की पीढ़ियों
पुरानी पुस्तकों में  रहस्य समझाया है।

स्वास्थ्य का अर्थ--

स्व:+अस्त=स्वास्थ्य
कहने का आशय यही है कि-
जो व्यक्ति स्वयं में अस्त होने की
कला में पारंगत हो गया,वही सदैव
स्वस्थ,सुन्दर,सहज,सरल,
सात्विक,सहृदय,सन्त,श्रद्धालु
हो सकता है।

बनारस की बानगी-

काशी विश्वनाथ के वासी
वैद्य श्री शिवदयाल जी 'विश्व'
ने स्वास्थ्य की सुन्दरता,
 वृद्धि के लिए बताया था कि-

स्वस्थ सुंदर शरीर की स्थापना हेतु

• शब्दों, वाणी पर नियंत्रण,
• विकारों पर अंकुश,
• विचारों को स्वतंत्र,
• तन को स्वच्छ,
• मन को सुन्दर तथा
• स्वयं को स्वछंद रखें।
 
आयुर्वेदाचार्य श्रीहरिपद का कथन है-
प्रज्ञावान,प्रायज्ञ,प्रज्ञानता एवं
प्रज्ञा बढ़ाने के लिए-
 
मन को स्थिरता,स्थायित्व देना जरूरी है।
मन भटका कि भाग्य अटका
फिर,जीवन के प्रति खुटका बना
रहता है। खाली मटका हो जाता है।
 
बिहार के एक वैद्यराज की सूक्ति थी-
 
आराम को हराम कर, इसे
राम-राम कहकर अलविदा करो।
विश्राम विष की तरह है,
इसका कोई दाम नहीं है।
इससे कभी नाम नहीं होता।
 
महावैद्य दशानन श्री रावण ने
आयुर्वेद के प्रख्यात ग्रन्थ
"अर्क प्रकाश" में लिखा है-
 
यदि स्वास्थ्य को अति सुन्दरता देना
चाहते हो,तो कठिन से कठिन कार्यों
कितनी भी कठिनाई से काम करने की
आदत डालो।

रावण का निष्कर्ष है-

कठिनता,कष्ट,संघर्ष ही तन-मन को
हर्ष,प्रसन्नता प्रदान करते हैं।
शरीर को जितना थकाओगे, यह
उतना ही आराम देगा, इसे जितना
विश्राम दोगे,उतना ही
'तन का तरकश' ढ़ीला हो जाएगा।
 
आराम-विश्राम बीमारियों को बुलाता है।
 
जवानी का पानी (सप्तधातु)
क्षीण कर देता है।
 
हकीम इशरतखुमैनी ने बोला-
संघर्ष का साथ सद्बुद्धि जागृत कर
स्वास्थ्य को सुन्दर बनाता है।
 
धूप थी,तो चलते रहे हम
छाँव होती,तो आराम करते।
 
आयुर्वेद की सहिंताओं में निवेदन है--

धन गया,तो कुछ नहीं गया

तन गया,तो सब कुछ गया।

हमारे परमपूज्य पूर्वजों ने
भारत की संस्कृति में अपनी
लेखनी से ग्रन्थों,भाष्यों में
अद्भुत प्रेरक विचारों का समागम
किया है,जिसके अध्ययन से
 
धन्य-धन्य होकर धन्यवाद देने,
 
जिन्हें "न मन" से भी नमन करने का
 
मन करता है। अथाह जतन (परिश्रम)
पश्चात,जग व जीवों के 'अमन' हेतु
बहुत कुछ छोड़ गए हैं।
हम फिर भी बेकार के विकार
बीमारी व व्याधियों में बर्बाद हैं।
 
सनातन धर्म के 18 पुराणों में प्राप्त
 पुरातन प्राचीन पुस्तक
गरुड़ पुराण एवं शिव पुराण
के अनुसार
 
"स्वभ्यम" --अर्थात
शरीर और आत्मा की
पवित्रता,पावनता,
शुद्धि-स्वस्थ स्थिति,
सप्त-विकार रहित होने के पश्चात ही
स्वस्थ व्यक्ति ही स्वर्गमार्ग पाकर
मुक्ति,मोक्ष,"स्वर्गगति"
यानि स्वर्ग जाने का अधिकारी है।

बीमारी की बला (आफत)

आयुर्वेद के एक ज्ञानवर्धक ग्रन्थ
"माधवनिदान" में
बीमारी की आरी
से नर-नारी के निराश होने के
कारणों का उल्लेख है-
 
■ स्वल्पदृश्य मतलब दूरदृष्टि की कमी,
■ "स्वल्प स्मृति" (जिसे याद न रहता हो)
■ स्वस्तिकर्मन (भला,करने का भाव न होना)
■ स्वल्प विचार (छोटी सोच)
■ स्वादु (ज्यादा खाने वाला)
 
ये विकार स्वास्थ्य को
साधने में बाधक हैं।

कैसे बनाएं स्वास्थ्य को सुन्दर-

यदि जिन्दगी भर के लिए
स्वस्थ-सुन्दर बनना चाहते हैं,
तो जरनल टॉनिक के रूप में
एक बहुत ही असरकारक
 
स्वास्थ्यवर्द्धक हर्बल ओषधि
"अमृतम गोल्ड माल्ट"
एक योग-अनेक रोग नाशक योग है।
सेवन का तरीका-
दिन में 2 या 3 बार
2 से 3 चम्मच लेवें।
 
मोटापा कम करने हेतु
गर्म पानी से एवं हेल्थ बनाने के लिए
गर्म दूध से लेना चाहिए।
 
वातविकार,थायराइड की परेशानी में
ऑर्थोकी गोल्ड माल्ट व केप्सूल
 
बालों की समस्या का स्थाई इलाज हेतु
कुन्तल केयर हर्बल हेयर बास्केट
उपयोग करें।
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