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"कीलिव माल्ट"यकृत एवं प्लीहा की सम्पूर्ण समस्या निराकरण हेतु बहुत ही लाभकारी ओषधि है। चिकित्सा ग्रन्थों में उल्लेख है कि वर्षा ऋतु में लिवर की विशेष सुरक्षा करना चाहिए।
इन दिनों प्रदूषित जल के कारण अनेकों बीमारी पनपने लगती है। इसके लिये कीलिव माल्ट तन रक्षक के रूप में अटूट विश्वसनीय ओषधि है।
लोग यकृत की रक्षा हेतु "मकोय एवं पुर्ननवा की भाजी (सब्जी) बनाकर खाने के साथ खाया करते थे यह पुराने समय से लिवर की प्राकृतिक सर्वोत्तम दवा है।
धनिया,
नागरमोथा
निशोथ
कुटकी
कालमेघ
करील
गुलकन्द
वायविडंग
शुण्ठी
पिप्पली
अजवायन
हरीतकी मुरब्बा
आंवला मुरब्बा
भृङ्गराज
अर्जुन छाल
आदि जड़ी बूटियाँ हैं
जो सदियों से लिवर को
क्रियाशील व मजबूत
बनाने में उपयोगी हैं।
इन सबको एक विशेष विधि
से काढ़ा बनाकर मिलाया गया है।
यकृत रोगों में सदपरिणाम की सुनिश्चितता के लिए जिन्दगी भर इसका सेवन अत्यन्त हितकारी है।
अधिकांश यकृत विकारों के लिये कीलिव माल्ट तुरन्त असरकारक अचूक ओषधि है। दूषित पाचन तन्त्र को शुध्द करने में यह चमत्कारी है।
1-चयापचय विकार
(Metabolic disorders)
2-लिवर में सूजन
3-भोजन का समय पर न पचना
4-उदरी ( Dropsy)
5-यकृत वृद्धि
6-खून का कम बनना
7-भूख की कमी
8-खाने की इच्छा न होना
9-पांडु पीलिया वृद्धि
10-पाचन सम्बन्धी विकार
11-रक्तसंचार की शिथिलता
12-रक्ताल्पता
13-गुल्म
14-संग्रहणी
15-आंतों की निर्बलता
16-अरुचि
17-यकृत की न्यून कार्यक्षमता आदि
बीमारियों को दूरकर ठीक करने में सहायक है। यकृत व पेट के रोगों से परेशान लोगों को एक बार इसका इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।
इसमें डाली गई "मंडूर भस्म" रक्ताल्पता अर्थात खून की कमी दूर करने के लिए बहुत ही फायदेमंद है।
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